केप्लर-452b — जिसे वैज्ञानिक पृथ्वी का “कज़िन” कहते हैं — हमारी पृथ्वी से लगभग 1,400 प्रकाश-वर्ष दूर सिग्नस तारामंडल में मौजूद है।
यह एक सूर्य जैसे तारे की परिक्रमा करता है और उसी हैबिटेबल ज़ोन में है जहाँ तरल पानी संभव हो सकता है।
इस ग्रह का एक साल होता है 385 पृथ्वी दिनों का।
🌌🌍
#Kepler452b #EarthsCousin #SpaceMystery #HabitableZone #ScienceFacts #ब्रह्मांड #पृथ्वीका_कज़िन
केप्लर-452b — जिसे वैज्ञानिक पृथ्वी का “कज़िन” कहते हैं — हमारी पृथ्वी से लगभग 1,400 प्रकाश-वर्ष दूर सिग्नस तारामंडल में मौजूद है।
यह एक सूर्य जैसे तारे की परिक्रमा करता है और उसी हैबिटेबल ज़ोन में है जहाँ तरल पानी संभव हो सकता है।
इस ग्रह का एक साल होता है 385 पृथ्वी दिनों का।
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#गांधी_अमर_हैं
#भारत_की_आत्मा
#विचार_को_नहीं_मार_सकते
#गांधी_अमर_हैं
#भारत_की_आत्मा
#विचार_को_नहीं_मार_सकते
आपका विरोध तभी प्रभावी होता है जब सामने वाले को लगता है कि यह विरोध सच में नुकसानदायक होगा अन्यथा विरोध का कोई मतलब नहीं होता
आपका विरोध तभी प्रभावी होता है जब सामने वाले को लगता है कि यह विरोध सच में नुकसानदायक होगा अन्यथा विरोध का कोई मतलब नहीं होता
वोटर—पहचान दो।
किसान—सबूत पेश करो।
निर्दोष—पहले जेल जाओ।
देशभक्त—नारा लगाओ।
अक्लमंद—चुप रहो।
पहाड़—परमिट दिखाओ।
नदी—लाइसेंस लाओ।
जंगल—काग़ज़ात पूरे करो।
जब हर सच से प्रमाण मांगा जाए
उसे तानाशाही कहते हैं।#साबित_करो_राज
#काग़ज़ी_लोकतंत्र
वोटर—पहचान दो।
किसान—सबूत पेश करो।
निर्दोष—पहले जेल जाओ।
देशभक्त—नारा लगाओ।
अक्लमंद—चुप रहो।
पहाड़—परमिट दिखाओ।
नदी—लाइसेंस लाओ।
जंगल—काग़ज़ात पूरे करो।
जब हर सच से प्रमाण मांगा जाए
उसे तानाशाही कहते हैं।#साबित_करो_राज
#काग़ज़ी_लोकतंत्र
शंकराचार्य जी के साथ ऐसा व्यवहार गैर-भाजपा शासित राज्य ने किया होता, तब पता चल जाता कि “शंकराचार्य का अपमान” कितना बड़ा अपराध है।
लेकिन सच यही है कि धर्म की राजनीति में धर्म के लिए कोई स्थान नहीं होता। वहाँ न शंकराचार्य मायने रखते हैं, न संत, न आस्था। वहाँ केवल सत्ता होती है, रणनीति होती है और वोटों का गणित होता है।
यह घटना उस चरित्र का पर्दाफाश है जहाँ धर्म चुनावी औज़ार है—न कि सम्मान का विषय।
#अविमुक्तेश्वेरानंद #माघमेला
शंकराचार्य जी के साथ ऐसा व्यवहार गैर-भाजपा शासित राज्य ने किया होता, तब पता चल जाता कि “शंकराचार्य का अपमान” कितना बड़ा अपराध है।
लेकिन सच यही है कि धर्म की राजनीति में धर्म के लिए कोई स्थान नहीं होता। वहाँ न शंकराचार्य मायने रखते हैं, न संत, न आस्था। वहाँ केवल सत्ता होती है, रणनीति होती है और वोटों का गणित होता है।
यह घटना उस चरित्र का पर्दाफाश है जहाँ धर्म चुनावी औज़ार है—न कि सम्मान का विषय।
#अविमुक्तेश्वेरानंद #माघमेला
डीडी न्यूज़ जैसे सरकारी चैनल पर बैठकर न्यूज़ एंकर सुधीर चौधरी का यह कहना कि “हम इसलिए पिछड़ रहे हैं क्योंकि हमारे यहाँ लोकतंत्र है”—महज़ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि हमारे समय की राजनीतिक और बौद्धिक गिरावट का गंभीर संकेत है। यह वक्तव्य जितना सरल दिखता है, उतना ही खतरनाक है, क्योंकि यह देश की तमाम नाकामियों की जिम्मेदारी लोकतंत्र पर डालकर सत्ता को कटघरे से बाहर करने की कोशिश करता है।
डीडी न्यूज़ जैसे सरकारी चैनल पर बैठकर न्यूज़ एंकर सुधीर चौधरी का यह कहना कि “हम इसलिए पिछड़ रहे हैं क्योंकि हमारे यहाँ लोकतंत्र है”—महज़ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि हमारे समय की राजनीतिक और बौद्धिक गिरावट का गंभीर संकेत है। यह वक्तव्य जितना सरल दिखता है, उतना ही खतरनाक है, क्योंकि यह देश की तमाम नाकामियों की जिम्मेदारी लोकतंत्र पर डालकर सत्ता को कटघरे से बाहर करने की कोशिश करता है।
कोई तो बताओ यह सही रास्ता है भी या नहीं
कोई तो बताओ यह सही रास्ता है भी या नहीं
गांधी का राम सत्य और अहिंसा है, तुलसीदास का राम करुणा और मर्यादा।
आज राजनीति ने दोनों का अपहरण कर दिया—राम उन्माद के लिए, गांधी ‘राष्ट्रविरोधी’ के लिए।
नफ़रत की राजनीति पूछती है—राम या गांधी?
असल सवाल है—सत्य और करुणा या सत्ता और हिंसा?
गांधी का राम सत्य और अहिंसा है, तुलसीदास का राम करुणा और मर्यादा।
आज राजनीति ने दोनों का अपहरण कर दिया—राम उन्माद के लिए, गांधी ‘राष्ट्रविरोधी’ के लिए।
नफ़रत की राजनीति पूछती है—राम या गांधी?
असल सवाल है—सत्य और करुणा या सत्ता और हिंसा?
बेईमानी और षड्यंत्र तो वहाँ पनपते हैं जहाँ कुर्सियाँ पुरानी पड़ जाती हैं और नीयतें धुंधली।
जब सत्ता या व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग युवाओं की आवाज़ को ही “उपद्रव” बताने लगें, तो समझ लीजिए कि असली डर उनकी राजनीति को है, न कि देश को।
इसलिए सवाल युवा पर नहीं—उन पर उठना चाहिए जो हर सवाल को ख़तरा समझते हैं।
बेईमानी और षड्यंत्र तो वहाँ पनपते हैं जहाँ कुर्सियाँ पुरानी पड़ जाती हैं और नीयतें धुंधली।
जब सत्ता या व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग युवाओं की आवाज़ को ही “उपद्रव” बताने लगें, तो समझ लीजिए कि असली डर उनकी राजनीति को है, न कि देश को।
इसलिए सवाल युवा पर नहीं—उन पर उठना चाहिए जो हर सवाल को ख़तरा समझते हैं।
आज लालकिला नहीं, देश की अस्मिता पर हमला हुआ है।
अब वक्त है — निंदा नहीं, निर्मूलन का! 🇮🇳 और हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी सुधारने की जरूरत है
#DelhiBlast #RedFort #StopTerrorism #IndiaAgainstTerror #NoMercyForTerror #JaiHind #NationFirst
आज लालकिला नहीं, देश की अस्मिता पर हमला हुआ है।
अब वक्त है — निंदा नहीं, निर्मूलन का! 🇮🇳 और हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी सुधारने की जरूरत है
#DelhiBlast #RedFort #StopTerrorism #IndiaAgainstTerror #NoMercyForTerror #JaiHind #NationFirst
अगर AIMIM जैसी पार्टियों को 1-2 सीटें भी मिल गईं, तो आने वाले 4-5 सालों तक देश में धार्मिक उन्माद की राजनीति ही हावी रहेगी।
जब तक बांटने वाली सोच खत्म नहीं होगी, तब तक विकास की राजनीति आगे नहीं बढ़ सकती।
अब फैसला जनता के हाथ में है — वोट सोच-समझकर देना! 🇮🇳
#VoteForDevelopment #IndiaDecides #Democracy #Politics #VoteWisely
अगर AIMIM जैसी पार्टियों को 1-2 सीटें भी मिल गईं, तो आने वाले 4-5 सालों तक देश में धार्मिक उन्माद की राजनीति ही हावी रहेगी।
जब तक बांटने वाली सोच खत्म नहीं होगी, तब तक विकास की राजनीति आगे नहीं बढ़ सकती।
अब फैसला जनता के हाथ में है — वोट सोच-समझकर देना! 🇮🇳
#VoteForDevelopment #IndiaDecides #Democracy #Politics #VoteWisely
भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बधाई। देश को गर्व है इन महिलाओं पर #womensworldcup2025
भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बधाई। देश को गर्व है इन महिलाओं पर #womensworldcup2025