फाल्गुन मास में महादेव का प्रिय त्यौहार महाशिवरात्रि आता है, इसके साथ ही रंगों का त्यौहार होली भी इसी महीने आता है।
फाल्गुन मास में महादेव का प्रिय त्यौहार महाशिवरात्रि आता है, इसके साथ ही रंगों का त्यौहार होली भी इसी महीने आता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 27 नक्षत्रों में एक मघा से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में वास करते हैं, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 27 नक्षत्रों में एक मघा से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में वास करते हैं, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है।
#RavidasJayanti2026 #Ravidas #Raidas #mystic #ganga #kashi #bhakti #hindufestivals #bhaktisarovar
संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है।
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मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है।
मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है।
जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सौभाग्य से होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में खुशियों का संचार होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शिवजी को गंगा जल, अक्षत्, पुष्प, धतूरा, धूप, फल, चंदन, गाय का दूध आदि अर्पित कर पूजन करना चाहिये।
जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सौभाग्य से होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में खुशियों का संचार होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शिवजी को गंगा जल, अक्षत्, पुष्प, धतूरा, धूप, फल, चंदन, गाय का दूध आदि अर्पित कर पूजन करना चाहिये।
माघ मास की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से शुरू शुरू हो कर, 29 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 38 मिनट आर समाप्त होगी।
माघ मास की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से शुरू शुरू हो कर, 29 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 38 मिनट आर समाप्त होगी।
भगवान विष्णु की करुणामय विनती को सुन कर माता नें तूफान का स्तम्भन किया और भगवान को संसार की चिन्ता से मुक्त किया।
माँ बगला मुखी के देश में तीन ही स्थान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं।
भगवान विष्णु की करुणामय विनती को सुन कर माता नें तूफान का स्तम्भन किया और भगवान को संसार की चिन्ता से मुक्त किया।
माँ बगला मुखी के देश में तीन ही स्थान है, जो दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते 🙏
हर माह शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी मनाई जाती है, दुर्गाष्टमी को दुर्गा जी के काली, भवानी, जगदम्बा, नवदुर्गा आदि स्वरूपों की पूजा की जाती है।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते 🙏
हर माह शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी मनाई जाती है, दुर्गाष्टमी को दुर्गा जी के काली, भवानी, जगदम्बा, नवदुर्गा आदि स्वरूपों की पूजा की जाती है।
महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था, बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की।
महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था, बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की।
माँ नर्मदा प्राकट्योत्सव के एक दिन पहले बड़ी संख्या में लोग नर्मदा नदी के तट पर पहुंचते हैं और भजन कीर्तन करते हैं, अगली सुबह लोग नर्मदा में स्नान के बाद शिव मंदिर में पूजा करते हैं।
माँ नर्मदा प्राकट्योत्सव के एक दिन पहले बड़ी संख्या में लोग नर्मदा नदी के तट पर पहुंचते हैं और भजन कीर्तन करते हैं, अगली सुबह लोग नर्मदा में स्नान के बाद शिव मंदिर में पूजा करते हैं।
दस महाविद्याओं में भगवती त्रिपुर भैरवी की साधना से साधक को समाज में यश, सम्मान, समाज में प्रतिष्ठा तथा वर्चस्व प्राप्त होता है। दशमहाविद्या की सारिणी में इन्हीं आदिशक्ति को त्रिपुर भैरवी गिरिजा भैरवी भी कहा गया है।
दस महाविद्याओं में भगवती त्रिपुर भैरवी की साधना से साधक को समाज में यश, सम्मान, समाज में प्रतिष्ठा तथा वर्चस्व प्राप्त होता है। दशमहाविद्या की सारिणी में इन्हीं आदिशक्ति को त्रिपुर भैरवी गिरिजा भैरवी भी कहा गया है।
रथ सप्तमी को विभिन्न नामों से जाना जाता है, माघ शुक्ल सप्तमी के कारण इसे माघी सप्तमी, अचला सप्तमी आरोग्य सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी और अर्क सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
रथ सप्तमी को विभिन्न नामों से जाना जाता है, माघ शुक्ल सप्तमी के कारण इसे माघी सप्तमी, अचला सप्तमी आरोग्य सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी और अर्क सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
भगवान कार्तिकेय को षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह का स्वामी कहा गया है। जिनकी जन्म कुंडली में मंगल अच्छी स्थिति में नहीं चल रहा हो, उन्हें स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और उनके निमित्त व्रत रखना चाहिए।
महीने की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है, षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है।
भगवान कार्तिकेय को षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह का स्वामी कहा गया है। जिनकी जन्म कुंडली में मंगल अच्छी स्थिति में नहीं चल रहा हो, उन्हें स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और उनके निमित्त व्रत रखना चाहिए।
महीने की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है, षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है।
दस महाविद्या में चौथी देवी मानी जाने वाली मां भुवनेश्वरी की साधना जीवन के सभी सुख, शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करती है।
भक्तों को अभय एवं सिद्धियां प्रदान करने वाली भुवनेश्वरी को आदिशक्ति और मूल प्रकृति का मूल कहे जाने वाली माँ भुवनेश्वरी को शताक्षी तथा शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है।
दस महाविद्या में चौथी देवी मानी जाने वाली मां भुवनेश्वरी की साधना जीवन के सभी सुख, शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करती है।
भक्तों को अभय एवं सिद्धियां प्रदान करने वाली भुवनेश्वरी को आदिशक्ति और मूल प्रकृति का मूल कहे जाने वाली माँ भुवनेश्वरी को शताक्षी तथा शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है।
गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन देवी त्रिपुर सुंदरी की आराधना के लिए समर्पित होता है। इन्हें षोडशी, ललिता और राजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है।
देवी त्रिपुर सुंदरी सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं, और इनकी कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
इनकी साधना का प्रचलित मंत्र है ऐ ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:
गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन देवी त्रिपुर सुंदरी की आराधना के लिए समर्पित होता है। इन्हें षोडशी, ललिता और राजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है।
देवी त्रिपुर सुंदरी सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं, और इनकी कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
इनकी साधना का प्रचलित मंत्र है ऐ ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:
मां तारा को धन, वैभव और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है, 10 महाविद्याओं में इनका स्थान दूसरा माना गया है।
मां तारा की आराधना से साधक को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
इनकी साधना का प्रचलित मंत्र "ऊँ ह्नीं स्त्रीं हुम फट" है।
मां तारा को धन, वैभव और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है, 10 महाविद्याओं में इनका स्थान दूसरा माना गया है।
मां तारा की आराधना से साधक को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
इनकी साधना का प्रचलित मंत्र "ऊँ ह्नीं स्त्रीं हुम फट" है।
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा की जाती है, दस महाविद्या में माँ काली प्रथम रूप है, जो अभंयकारी हैं, मंगलकारी हैं और असुरों का नाश करने वाली हैं।
#mahakali #guptnavratri #adyakali #dasmahavidya
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा की जाती है, दस महाविद्या में माँ काली प्रथम रूप है, जो अभंयकारी हैं, मंगलकारी हैं और असुरों का नाश करने वाली हैं।
#mahakali #guptnavratri #adyakali #dasmahavidya
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है, पंचाग के अनुसार इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो रही है, वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है, पंचाग के अनुसार इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो रही है, वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा।
मौनी अमावस्या पर देश भर से लोग प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के तट पर देवताओं का निवास होता है, इसीलिए इस दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान का अत्यधिक महत्व है।
मौनी अमावस्या पर देश भर से लोग प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के तट पर देवताओं का निवास होता है, इसीलिए इस दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान का अत्यधिक महत्व है।
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
शिव पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन की में आ रही समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
शिव पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन की में आ रही समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
प्रदोष व्रत के दिन सूर्यास्त होने से एक घंटें पहले ईशान कोण में किसी एकांत जगह बैठ कर भगवान शिव का जलाभिषेक और ऊं नम: शिवाय: का जाप करना चाहिये।
प्रदोष व्रत के दिन सूर्यास्त होने से एक घंटें पहले ईशान कोण में किसी एकांत जगह बैठ कर भगवान शिव का जलाभिषेक और ऊं नम: शिवाय: का जाप करना चाहिये।
इस दिन गुड़ और चावल को उबालकर सूर्यदेव को चढ़ाया जाता है, इसी प्रसाद का नाम ही पोंगल है।
चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के चार पोंगल होते हैं, भोगी पोंगल ,सूर्य पोंगल ,मट्टू पोंगल और कन्या पोंगल।
इस दिन गुड़ और चावल को उबालकर सूर्यदेव को चढ़ाया जाता है, इसी प्रसाद का नाम ही पोंगल है।
चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के चार पोंगल होते हैं, भोगी पोंगल ,सूर्य पोंगल ,मट्टू पोंगल और कन्या पोंगल।