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ऑटोइम्यून डिसऑर्डर: महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक चुनौतीपूर्ण समस्या 

ऑटोइम्यून विकार तब होते हैं, जब शरीर की रक्षा प्रणाली, जो आमतौर पर संक्रमणों से बचाती है, लेकिन गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला कर देती है। इन विकारों में गठिया, ल्यूपस, थायरॉइडाइटिस, सोरायसिस और सोजोग्रेन सिंड्रोम आदि शामिल हैं।
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर: महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक चुनौतीपूर्ण समस्या 
ऑटोइम्यून विकार तब होते हैं, जब शरीर की रक्षा प्रणाली, जो आमतौर पर संक्रमणों से बचाती है, लेकिन गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला कर देती है। इन विकारों में गठिया, ल्यूपस, थायरॉइडाइटिस, सोरायसिस और सोजोग्रेन सिंड्रोम आदि शामिल हैं।
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February 6, 2026 at 12:46 AM
डिजिटल स्पेस में महिलाओं के लिए डर की राजनीति तकनीक और सत्ता का टकराव

डिजिटल-युग में महिलाओं के प्रति ऑनलाइन हिंसा चाहे वह सोशल मीडिया पर अपशब्द हों, निजी तस्वीरों का गैर-अनुमति प्रसार, ट्रोलिंग  या स्टॉकिंग आज चिंता का एक बेहद गंभीर विषय बन चुका है।
डिजिटल स्पेस में महिलाओं के लिए डर की राजनीति तकनीक और सत्ता का टकराव
डिजिटल-युग में महिलाओं के प्रति ऑनलाइन हिंसा चाहे वह सोशल मीडिया पर अपशब्द हों, निजी तस्वीरों का गैर-अनुमति प्रसार, ट्रोलिंग  या स्टॉकिंग आज चिंता का एक बेहद गंभीर विषय बन चुका है।
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February 5, 2026 at 12:30 AM
अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में नवी मुंबई की महिला स्ट्रीट वेंडर्स का संघर्ष

स्ट्रीट मार्केट में काम करने वाली महिलाएं अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। यहां न नौकरी की सुरक्षा है, न तय आमदनी, न सामाजिक सुरक्षा और न ही सरकारी योजनाओं तक आसान पहुंच। बारिश हो, तेज़ गर्मी हो या बीमारी—काम न करने का…
अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में नवी मुंबई की महिला स्ट्रीट वेंडर्स का संघर्ष
स्ट्रीट मार्केट में काम करने वाली महिलाएं अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। यहां न नौकरी की सुरक्षा है, न तय आमदनी, न सामाजिक सुरक्षा और न ही सरकारी योजनाओं तक आसान पहुंच। बारिश हो, तेज़ गर्मी हो या बीमारी—काम न करने का मतलब है उस दिन कोई कमाई नहीं।
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February 4, 2026 at 12:45 AM
दहेज प्रथा के खिलाफ सत्य रानी चड्ढा की संघर्षपूर्ण लड़ाई| #IndianWomenInHistory

सत्य रानी चड्ढा ने समाज की उस चुप्पी को चुनौती दी, जो दहेज-हत्या को सहनशीलता और समझौते की आड़ में सामान्य बना देती है। उनका संघर्ष इस मायने में ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने दहेज-हिंसा को एक व्यक्तिगत समस्या नहीं,…
दहेज प्रथा के खिलाफ सत्य रानी चड्ढा की संघर्षपूर्ण लड़ाई| #IndianWomenInHistory
सत्य रानी चड्ढा ने समाज की उस चुप्पी को चुनौती दी, जो दहेज-हत्या को सहनशीलता और समझौते की आड़ में सामान्य बना देती है। उनका संघर्ष इस मायने में ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने दहेज-हिंसा को एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्या के रूप में सबके सामने लाने की कोशिश की।
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February 4, 2026 at 12:30 AM
कैसे खेल कमेंट्री में सेक्सिज़म महिला खिलाड़ियों को सीमित करती है

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय शूटर मनु भाकर के साथ हुई घटना इसका उदाहरण है। दो ओलंपिक पदक जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे उनकी मेहनत या रणनीति पर सवाल करने के बजाय उनकी सुंदरता और निजी रिश्तों पर टिप्पणी की गई।
कैसे खेल कमेंट्री में सेक्सिज़म महिला खिलाड़ियों को सीमित करती है
पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय शूटर मनु भाकर के साथ हुई घटना इसका उदाहरण है। दो ओलंपिक पदक जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे उनकी मेहनत या रणनीति पर सवाल करने के बजाय उनकी सुंदरता और निजी रिश्तों पर टिप्पणी की गई।
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February 3, 2026 at 12:46 AM
भारतीय परिवार की राजनीति में संयुक्त, एकल और चुने हुए परिवारों की भूमिका

भारत में संयुक्त परिवार पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा, साझा संसाधन, और पीढ़ीगत उत्तरदायित्व का माध्यम रहा है, जबकि एकल परिवार में व्यक्तिगत आज़ादी और आर्थिक निर्णय ज्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देते हैं।
भारतीय परिवार की राजनीति में संयुक्त, एकल और चुने हुए परिवारों की भूमिका
भारत में संयुक्त परिवार पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा, साझा संसाधन, और पीढ़ीगत उत्तरदायित्व का माध्यम रहा है, जबकि एकल परिवार में व्यक्तिगत आज़ादी और आर्थिक निर्णय ज्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देते हैं।
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February 3, 2026 at 12:30 AM
बच्चों को यौन अपराध की ओर धकेलते समाज, स्कूल और रेप कल्चर की गहरी परतें

आज के आधुनिक दौर में भी भारतीय पितृसत्तात्मक समाज की रुढ़िवादी मानसिकता के कारण सेक्स, शरीर और सहमती पर कभी भी खुलकर बातचीत नहीं होती है। चाहे फिर वो घर हो या स्कूल, जो  जगहें बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित होनी चाहिए, उनके लिए…
बच्चों को यौन अपराध की ओर धकेलते समाज, स्कूल और रेप कल्चर की गहरी परतें
आज के आधुनिक दौर में भी भारतीय पितृसत्तात्मक समाज की रुढ़िवादी मानसिकता के कारण सेक्स, शरीर और सहमती पर कभी भी खुलकर बातचीत नहीं होती है। चाहे फिर वो घर हो या स्कूल, जो  जगहें बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित होनी चाहिए, उनके लिए अक्सर बातचीत की जगह चुप्पी और डर पैदा करते हैं।
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February 2, 2026 at 12:46 AM
पुरुषों की दुनिया में जगह बनाने वाली भारतीय फिल्म संपादक रेणु सालुजा| #IndianWomenInHistory

रेणु मानती थीं कि एडिटिंग “पटकथा लेखन का तीसरा चरण” होती है। वह सिर्फ कट्स नहीं करती थीं, बल्कि निर्देशक की सोच को नया रूप देती थीं। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा था, “वह सिर्फ एक एडिटर नहीं थीं, वह एक…
पुरुषों की दुनिया में जगह बनाने वाली भारतीय फिल्म संपादक रेणु सालुजा| #IndianWomenInHistory
रेणु मानती थीं कि एडिटिंग “पटकथा लेखन का तीसरा चरण” होती है। वह सिर्फ कट्स नहीं करती थीं, बल्कि निर्देशक की सोच को नया रूप देती थीं। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा था, “वह सिर्फ एक एडिटर नहीं थीं, वह एक फिल्म निर्माता थीं।”
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February 2, 2026 at 12:30 AM
महिलाओं का स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की चुनौतियां

एएमआर एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन इसका असर सभी पर एक जैसा नहीं होता। महिलाएं और लड़कियां इस संकट से ज़्यादा प्रभावित होती हैं। यह फर्क सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं, बल्कि महिलाओं के रोज़मर्रा के जीवन और स्वास्थ्य…
महिलाओं का स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की चुनौतियां
एएमआर एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन इसका असर सभी पर एक जैसा नहीं होता। महिलाएं और लड़कियां इस संकट से ज़्यादा प्रभावित होती हैं। यह फर्क सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं, बल्कि महिलाओं के रोज़मर्रा के जीवन और स्वास्थ्य अनुभवों में साफ़ दिखता है।
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January 29, 2026 at 12:45 AM
मुग़ल कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली महिलाएं चित्रकार

मुग़ल काल की चित्रकला केवल पुरुष कलाकारों तक सीमित नहीं थी। ज़नाना के भीतर रहते हुए भी कई महिलाएं चित्र बना रही थीं और अपनी कला के माध्यम से अलग नज़रिया पेश कर रही थीं। साहिफ़ा बानू, रुकैया बानू, नूरी नादिरा बानो, नीनी और खुर्शीद…
मुग़ल कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली महिलाएं चित्रकार
मुग़ल काल की चित्रकला केवल पुरुष कलाकारों तक सीमित नहीं थी। ज़नाना के भीतर रहते हुए भी कई महिलाएं चित्र बना रही थीं और अपनी कला के माध्यम से अलग नज़रिया पेश कर रही थीं। साहिफ़ा बानू, रुकैया बानू, नूरी नादिरा बानो, नीनी और खुर्शीद बानू जैसी महिला चित्रकार इस बात का प्रमाण हैं कि मुग़ल कला में महिलाओं की भी अहम भूमिका थी।
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January 29, 2026 at 12:30 AM
गर्लबॉस से बर्नआउट तक: क्यों महिलाओं की थकान को सामान्य बना दिया गया है

पूंजीवाद ज़्यादा काम करने को शौक़, जुनून या आज़ादी के नाम पर सही ठहराया जाता है। ऐसा दिखाया जाता है मानो इंसान अपनी मर्ज़ी से खुद को थका रहा हो। दार्शनिक ब्युंग-चुल हान अपनी किताब द बर्नआउट सोसाइटी (2010) में लिखते हैं कि आज…
गर्लबॉस से बर्नआउट तक: क्यों महिलाओं की थकान को सामान्य बना दिया गया है
पूंजीवाद ज़्यादा काम करने को शौक़, जुनून या आज़ादी के नाम पर सही ठहराया जाता है। ऐसा दिखाया जाता है मानो इंसान अपनी मर्ज़ी से खुद को थका रहा हो। दार्शनिक ब्युंग-चुल हान अपनी किताब द बर्नआउट सोसाइटी (2010) में लिखते हैं कि आज का इंसान खुद ही खुद का शोषण करने लगा है।
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January 28, 2026 at 1:02 AM
कैनवास से विद्रोह तक: भारतीय विज़ुअल कल्चर में दलित कलाकारों का प्रतिरोध

दलित विजुअल कल्चर में विरोध के लिए किसी महंगे कैनवास की ज़रूरत नहीं पड़ी, बल्कि रोज़मर्रा की साधारण वस्तुओं को ही अपनी आवाज़ बना लिया गया। इतिहासकार गैरी टार्टाकोव बताते हैं, कि जिन चीज़ों को कभी दलितों को अपमानित करने के लिए…
कैनवास से विद्रोह तक: भारतीय विज़ुअल कल्चर में दलित कलाकारों का प्रतिरोध
दलित विजुअल कल्चर में विरोध के लिए किसी महंगे कैनवास की ज़रूरत नहीं पड़ी, बल्कि रोज़मर्रा की साधारण वस्तुओं को ही अपनी आवाज़ बना लिया गया। इतिहासकार गैरी टार्टाकोव बताते हैं, कि जिन चीज़ों को कभी दलितों को अपमानित करने के लिए उन पर थोपा गया था, आज के कलाकारों ने उन्हें ही विरोध का टूल  बना दिया है।
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January 28, 2026 at 12:30 AM
महिला शिक्षिकाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद उनके बुनियादी अधिकारों की अनदेखी

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के शैक्षणिक संस्थानों में 2024-25 में कुल शिक्षकों में से पुरुषों की संख्या 43,400 थी जबकि महिलाओं की संख्या 1,18,558 थी, जो कि कुल शिक्षकों का लगभग दो तिहाई है।…
महिला शिक्षिकाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद उनके बुनियादी अधिकारों की अनदेखी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के शैक्षणिक संस्थानों में 2024-25 में कुल शिक्षकों में से पुरुषों की संख्या 43,400 थी जबकि महिलाओं की संख्या 1,18,558 थी, जो कि कुल शिक्षकों का लगभग दो तिहाई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में महिला शिक्षकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
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January 27, 2026 at 1:00 AM
ब्रेस्टमिल्क में यूरेनियम पर वैज्ञानिक चेतावनी और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियां

भारत में, अनुमानित 151 जिलों और 18 राज्यों में ग्राउंडवाटर में यूरेनियम प्रदूषण की रिपोर्ट है, और बिहार में लगभग 1.7 फीसद ग्राउंडवाटर स्रोत प्रभावित हैं।
ब्रेस्टमिल्क में यूरेनियम पर वैज्ञानिक चेतावनी और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियां
भारत में, अनुमानित 151 जिलों और 18 राज्यों में ग्राउंडवाटर में यूरेनियम प्रदूषण की रिपोर्ट है, और बिहार में लगभग 1.7 फीसद ग्राउंडवाटर स्रोत प्रभावित हैं।
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January 27, 2026 at 12:46 AM
दलित महिलाओं पर हिंसा, व्यवस्था की विफलता और न्याय के लिए कठिन संघर्ष

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में, अपहरणकर्ताओं से अपनी बेटी को बचाने की कोशिश में एक 50 वर्षीय दलित महिला के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
दलित महिलाओं पर हिंसा, व्यवस्था की विफलता और न्याय के लिए कठिन संघर्ष
बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में, अपहरणकर्ताओं से अपनी बेटी को बचाने की कोशिश में एक 50 वर्षीय दलित महिला के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
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January 22, 2026 at 12:30 AM
रेप कल्चर की राजनीति: नेताओं के बयान, मीडिया की चुप्पी और सर्वाइवर का संघर्ष

भारत में बलात्कार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह केवल एक अपराध तक सीमित नहीं रहें है, बल्कि यह राजनीति का सबसे शक्तिशाली टूल बन चुके हैं। हमारे पितृसत्तात्मक समाज में रुढ़िवादी मानसिकता वाले लोग और नेता इसे जाति, धर्म,…
रेप कल्चर की राजनीति: नेताओं के बयान, मीडिया की चुप्पी और सर्वाइवर का संघर्ष
भारत में बलात्कार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह केवल एक अपराध तक सीमित नहीं रहें है, बल्कि यह राजनीति का सबसे शक्तिशाली टूल बन चुके हैं। हमारे पितृसत्तात्मक समाज में रुढ़िवादी मानसिकता वाले लोग और नेता इसे जाति, धर्म, कपड़ों, समय या गलती से जोड़कर सर्वाइवर को ही दोषी ठहरा देते हैं।  
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January 21, 2026 at 12:45 AM
तलाक की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और महिलाओं पर उसका असमान बोझ

साल 2013 में के. श्रीनिवास राव बनाम डी.ए. दीपा के मामले में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि लंबी और कष्टदायक मुकदमेबाजी अपनेआप में मानसिक क्रूरता हो सकती है। यही तर्क उन व्यवस्थागत देरी पर भी लागू होना चाहिए, जिन्हें कभी-कभी न्यायिक…
तलाक की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और महिलाओं पर उसका असमान बोझ
साल 2013 में के. श्रीनिवास राव बनाम डी.ए. दीपा के मामले में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि लंबी और कष्टदायक मुकदमेबाजी अपनेआप में मानसिक क्रूरता हो सकती है। यही तर्क उन व्यवस्थागत देरी पर भी लागू होना चाहिए, जिन्हें कभी-कभी न्यायिक प्रक्रिया स्वयं बढ़ावा देती है।
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January 21, 2026 at 12:30 AM
भारतीय क्वीयर-फेमिनिस्ट कलाकारों की कला, स्मृति और प्रतिरोध की यात्रा 

क्वीयर-फेमिनिस्ट कला केवल प्रतिनिधित्व की मांग नहीं करती, बल्कि वह देखने, समझने और याद रखने के तरीकों को चुनौती देती है। यह कला किसी एक कैनवस, किसी गैलरी या किसी तयशुदा फ्रेम में क़ैद नहीं रहती। यह दीवारों से निकलकर सड़कों पर…
भारतीय क्वीयर-फेमिनिस्ट कलाकारों की कला, स्मृति और प्रतिरोध की यात्रा 
क्वीयर-फेमिनिस्ट कला केवल प्रतिनिधित्व की मांग नहीं करती, बल्कि वह देखने, समझने और याद रखने के तरीकों को चुनौती देती है। यह कला किसी एक कैनवस, किसी गैलरी या किसी तयशुदा फ्रेम में क़ैद नहीं रहती। यह दीवारों से निकलकर सड़कों पर आती है, शरीर के भीतर उतरती है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है।
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January 20, 2026 at 12:45 AM
भोजन की राजनीति में महिलाओं के श्रम की अनदेखी और सीमित आज़ादी

राजनीति में भी भोजन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। कभी इसे जाति की राजनीति से जोड़ा जाता है, तो कभी धर्म से। लेकिन बहुत कम बार यह सवाल उठता है कि हम जो भोजन खा रहे हैं, वह कैसे बन रहा है, किसके लिए बन रहा है और उसे बनाने वाला कौन है।
भोजन की राजनीति में महिलाओं के श्रम की अनदेखी और सीमित आज़ादी
राजनीति में भी भोजन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। कभी इसे जाति की राजनीति से जोड़ा जाता है, तो कभी धर्म से। लेकिन बहुत कम बार यह सवाल उठता है कि हम जो भोजन खा रहे हैं, वह कैसे बन रहा है, किसके लिए बन रहा है और उसे बनाने वाला कौन है।
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January 20, 2026 at 12:30 AM
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: अपने शरीर को अपनाने की मेरी राजनीतिक कदम

मैंने यह सीखा है कि मेरे शरीर पर सबसे पहला और आख़िरी अधिकार सिर्फ़ मेरा है। मुझे तय करना है कि मैं क्या करूँगी और क्या नहीं। और अगर मैं कुछ भी नहीं करना चाहती, तो वह भी मेरा ही फ़ैसला है। यही मेरा फेमिनिस्ट जॉय है। अपने शरीर पर अपना…
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: अपने शरीर को अपनाने की मेरी राजनीतिक कदम
मैंने यह सीखा है कि मेरे शरीर पर सबसे पहला और आख़िरी अधिकार सिर्फ़ मेरा है। मुझे तय करना है कि मैं क्या करूँगी और क्या नहीं। और अगर मैं कुछ भी नहीं करना चाहती, तो वह भी मेरा ही फ़ैसला है। यही मेरा फेमिनिस्ट जॉय है। अपने शरीर पर अपना अधिकार।
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January 19, 2026 at 12:46 AM
‘परफेक्ट फैमिली’: आदर्श परिवार की परतें खोलती एक संवेदनशील कहानी 

साल 2025 में यूट्यूब पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'परफेक्ट फैमिली’ आठ एपिसोड की यह श्रृंखला पूरी तरह से एक थेरेपी सेशन के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। यह सीरीज इसलिए खास है, क्योंकि यह आदर्श परिवार के उस खोल को उतार फेंकती है, जिसे हम समाज के…
‘परफेक्ट फैमिली’: आदर्श परिवार की परतें खोलती एक संवेदनशील कहानी 
साल 2025 में यूट्यूब पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'परफेक्ट फैमिली’ आठ एपिसोड की यह श्रृंखला पूरी तरह से एक थेरेपी सेशन के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। यह सीरीज इसलिए खास है, क्योंकि यह आदर्श परिवार के उस खोल को उतार फेंकती है, जिसे हम समाज के सामने ओढ़े रहते हैं।
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January 19, 2026 at 12:30 AM
झांसी की महिला ऑटो चालक की हत्या और असंगठित क्षेत्र में महिला सुरक्षा का सवाल

झांसी की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक अनीता चौधरी की हत्या ने देश में महिला सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश की इस घटना ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की ख़ामियों को उजागर करने का…
झांसी की महिला ऑटो चालक की हत्या और असंगठित क्षेत्र में महिला सुरक्षा का सवाल
झांसी की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक अनीता चौधरी की हत्या ने देश में महिला सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश की इस घटना ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की ख़ामियों को उजागर करने का भी काम किया है।
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January 16, 2026 at 12:46 AM
रति बार्थोलोम्यू: भारतीय रंगमंच में स्त्री दृष्टि और प्रतिरोध की सशक्त आवाज़| #IndianWomenInHistory

थिएटर परंपरा को मज़बूती देने वालों में रति बार्थोलोम्यू का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह एक निर्देशक, अभिनेत्री, नाटककार और बुद्धिजीवी रंगमंच कलाकार थीं ।
रति बार्थोलोम्यू: भारतीय रंगमंच में स्त्री दृष्टि और प्रतिरोध की सशक्त आवाज़| #IndianWomenInHistory
थिएटर परंपरा को मज़बूती देने वालों में रति बार्थोलोम्यू का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह एक निर्देशक, अभिनेत्री, नाटककार और बुद्धिजीवी रंगमंच कलाकार थीं ।
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January 16, 2026 at 12:30 AM
खास बात: हिंदी लेखिका और साहित्य समीक्षक हेमलता महिश्वर से 

चेतना का आधार तो डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन है। वहां से हम लोग अपना आधार लेते हैं। जो मनुष्यता को निर्मित करने पर केंद्रित है। निश्चित तौर पर हमारा जो समाज है। वो विभिन्न तरह के खांचों में बंटा हुआ है और आज भी उस खांचे की जो खाई है, वो हम…
खास बात: हिंदी लेखिका और साहित्य समीक्षक हेमलता महिश्वर से 
चेतना का आधार तो डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन है। वहां से हम लोग अपना आधार लेते हैं। जो मनुष्यता को निर्मित करने पर केंद्रित है। निश्चित तौर पर हमारा जो समाज है। वो विभिन्न तरह के खांचों में बंटा हुआ है और आज भी उस खांचे की जो खाई है, वो हम दूर नहीं कर पाए हैं।
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January 15, 2026 at 12:46 AM
केयर वर्क और पेरेंटहुड पर जरूरी सवाल खड़े करती मजेदार सीरीज़ है ‘सिंगल पापा’

जब बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ज़्यादातर पिता-पुत्र की कहानियां भी मर्दानगी और ताक़त के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहीं 'सिंगल पापा' एक मर्द को संवेदनशील, डरे हुए और बच्चे की देखभाल में जूझते हुए दिखाने की कोशिश अच्छी कर …
केयर वर्क और पेरेंटहुड पर जरूरी सवाल खड़े करती मजेदार सीरीज़ है ‘सिंगल पापा’
जब बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ज़्यादातर पिता-पुत्र की कहानियां भी मर्दानगी और ताक़त के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहीं 'सिंगल पापा' एक मर्द को संवेदनशील, डरे हुए और बच्चे की देखभाल में जूझते हुए दिखाने की कोशिश अच्छी कर  रही है।
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January 14, 2026 at 12:46 AM